प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कृषि बिल वापस लिए जाने की बात करे जाने के बाद सीएम हेमंत सोरेन ने पोस्ट करते हुए लिखा - " आज सुबह-सुबह देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने काले कृषि क़ानून को वापस लेने की घोषणा की। यह बहुत ही हास्यास्पद घोषणा है। अब पूरी भाजपा इस प्रचार में लगी है कि प्रधानमंत्री जी किसानों के हितैषी दिखें!यह बात साबित हुई है कि देश में आज भी लोकतंत्र जींदा है।हम माँग करते हैं कि प्रधानमंत्री जी तत्काल इस आंदोलन में मारे गए किसानों को 5-5 करोड़ रुपए मुआवज़ा दें और उन्हें शहीद का दर्जा दें। मारे गए किसानों के परिवार के सदस्य को नौकरी दें। उनके ऊपर जो FIR हुए हैं, न्यायालय में मामले लम्बित हैं, उन्हें अविलंब वापस ले।और इतने वक्त तक किसान जो सड़कों पर थे, जो घर-बार छोड़कर बाल-बच्चों के साथ सड़क पर थे, उन देश के सभी किसानों को फसल की क्षतिपूर्ति के लिए 10-10 लाख रुपए दें। साथ ही अविलंब केंद्रीय कृषि मंत्री को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।"
कृषि कानून को लेकर केंद्र सरकार बैकफुट आ गयी है। शुक्रवार को गुरु पर्व और कार्तिक पूर्णिमा के खास अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया। पीएम ने कहा कि मैं आज देशवासियों से क्षमा मांगते हुए यह कहना चाहता हूं कि हमारी तपस्या में कोई कमी रह गई होगी। उन्होंने कहा कि कुछ किसान भाइयों को समझा नहीं पाए। आज गुरुनानक देव का पवित्र पर्व है। ये समय किसी को दोष देने का समय नहीं है। आज पूरे देश को यह बताने आया हूं कि सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इस महीने के अंत में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू कर देंगे। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने आंदोलन पर बैठे लोगों को प्रकाश पर्व पर अपने घर वापस जाने की अपील की।